नालंदा परिसर ऑक्सी रीडिंग ज़ोन रायपुर

Nalanda Parisar OXY Reading Zone

Nalanda Parisar OXY Reading Zone Raipur पुस्तकें मनुष्य के आत्म-बल का सर्वश्रेष्ठ साधन हैं। महान देशभक्त एवं विद्वान लाला लाजपत राय ने पुस्तकों के महत्व के संदर्भ में कहा था: ” मैं पुस्तकों का नर्क में भी स्वागत करूँगा। इनमें वह शक्ति है जो नर्क को भी स्वर्ग बनाने की क्षमता रखती है। ” देश के लगभग समस्त छोटे-बड़े शहरों में अनेक प्रकार के पुस्तकालय उपलब्ध हैं। कुछ शहरों एवं ग्रामीण अंचलों में चलते-फिरते पुस्तकालय की भी व्यवस्था है जिससे साप्ताहिक क्रमानुसार लोग उक्त सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में ज़िला खनिज न्यास, पर्यावरण संरक्षण मंडल एवं रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा वर्ल्ड क्लास लाइब्रेरी का निर्माण किया गया है, सामान्य लाइब्रेरी में केवल किताबें होती है किन्तु इस लाइब्रेरी में दुनिया की तमाम सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस लाइब्रेरी का नाम नालंदा परिसर रखा गया हैं।

क्यों रखा गया नालंदा परिसर नाम ?

बौद्धकाल में तक्षशिला और नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों का विकास हुआ जिनके साथ बहुत अच्छे पुस्तकालय थे। तक्षशिला के पुस्तकालय में वेद, आयुर्वेद, धनुर्वेद, ज्योतिष, चित्रकला, कृषिविज्ञान, पशुपालन आदि अनेक विषयों के ग्रंथ संगृहीत थे। ईसा से लगभग 500 वर्ष पूर्व नालंदा के विशाल पुस्तकालय का वर्णन मिलता है। नालंदा विश्वविद्यालाय के तीन महान् पुस्तकालय थे-रत्नोदधि,रत्नसागर, रत्नरंजक। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया के 10,000 से अधिक छात्र पढ़ाई करते थे।भारत के इस गैरवशाली इतिहास को ध्यान में रखते हुए इस लाइब्रेरी का नाम नालंदा परिसर रखा गया हैं।

नालंदा परिसर की विशेषताएं

यह ऑक्सी रीडिंग जोन परिसर 6 एकड़ में फैला हुआ हैं। यह लाइब्रेरी चारों तरफ से हरे-भरे, छायादार पेड़ो के बीच में बनी हुई है इसलिए इसे ऑक्सी रीडिंग जोन भी कहा जाता हैं। यह छात्रों की पढ़ाई तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में एक नया आयाम जोड़ेगा।

इस जोन में यह मिलेगी सुविधाएं

  • यहां छात्र-छात्राओं को पढ़ने लिखने के लिए इंडोर और आउटडोर रीडिंग की सुविधा मिलेगी। 
  • यहां एक जी प्सल थ्री रीडिंग टॉवर बनाया जाएगा। जिसमें छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए आत्याधुनिक सुविधाएं रहेगी। 
  • इसके साथ ही बाहर के कैम्पस को पीपल, नीम आदि के पेड़ों से ऑक्सी जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ने के लिए चबूतरे आदि बनाए जाएंगे। 
  • लैण्ड स्कैप व गार्डन का निर्माण भी किया जाएगा। वर्तमान में जो खदान है उसे वाटर बॉडी के रूप में विकसित किया जाएगा। 
  • यह पूरा क्षेत्र फ्री वाई-फाई जोन होगा। यहां रीडिंग जोन, लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी, रेप्रोग्राफी सेक्शन, डिश्कशन सेक्सन और मल्टी मीडिया रूम बनाए जाएंगे। 
  • यहां बुक स्टोर, स्टेशनरी, कम्प्यूटर सेंटर तथा दो कैफेटेरिया का निर्माण भी किया जाएगा।

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