joharcg.com मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण को समर्पित एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को प्रतिभागियों का जोरदार समर्थन मिला।
सत्र में वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के बिना समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाता है। एक तिहाई आरक्षण महिलाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान करेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह अवसर मिलने पर वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि आरक्षण केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का मजबूत आधार है। इससे समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार होगा।
सत्र में नीति-निर्माताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया।
अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। एक तिहाई आरक्षण का समर्थन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो महिलाओं को मुख्यधारा में लाने और समाज के सर्वांगीण विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

