joharcg.com रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और तथाकथित “पॉपकॉर्न स्टेटस” की प्रवृत्ति से बाहर निकलकर ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व विकास की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से तकनीक का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए करने तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों, सामाजिक मूल्यों और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक आज जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग युवाओं के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और त्वरित मनोरंजन की संस्कृति ने युवाओं के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। ऐसे में संतुलित और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाना आवश्यक है।

श्री डेका ने कहा कि “पॉपकॉर्न स्टेटस” की संस्कृति, जिसमें व्यक्ति लगातार अल्पकालिक और त्वरित मनोरंजन की ओर आकर्षित होता है, युवाओं की एकाग्रता और धैर्य को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए गहन अध्ययन, निरंतर प्रयास, अनुशासन और दीर्घकालिक सोच आवश्यक है। केवल तात्कालिक लोकप्रियता या आभासी दुनिया की पहचान जीवन के वास्तविक लक्ष्यों का विकल्प नहीं हो सकती।
उन्होंने युवाओं को पुस्तकों के अध्ययन, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, नवाचार और सामुदायिक कार्यों से जुड़ने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि व्यक्तित्व का समग्र विकास तभी संभव है, जब युवा अपने समय का सदुपयोग करते हुए ज्ञान और अनुभव दोनों अर्जित करें। डिजिटल माध्यम सीखने और विकास का सशक्त साधन बन सकता है, यदि उसका उपयोग सही दिशा में किया जाए।

राज्यपाल ने शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं को डिजिटल दुनिया के लाभ और सीमाओं दोनों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर ऐसी सकारात्मक वातावरण का निर्माण कर सकते हैं, जहां तकनीक का उपयोग सीखने, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाए।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और देश की प्रगति में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। इसलिए युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा में लगाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने आत्मानुशासन, समय प्रबंधन और सतत सीखने की आदत को सफलता की कुंजी बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और युवाओं ने भी डिजिटल संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली के महत्व पर अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ सकता है, जबकि उसका अतिरेक कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों को जन्म दे सकता है।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने युवाओं से आह्वान किया कि वे डिजिटल दुनिया के साथ संतुलन बनाते हुए अपने ज्ञान, कौशल और मानवीय मूल्यों को समृद्ध करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूक और आत्मानुशासित युवा ही विकसित भारत और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

