सहकार से समृद्धि

joharcg.com सहकार से समृद्धि” विषय पर छह राज्यों की क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और किसानों व स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में कई राज्यों के सहकारिता विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता आंदोलन देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छोटे किसानों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को सहकारी मॉडल से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता सामूहिक भागीदारी और सामाजिक विकास का भी प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को सहकारी संस्थाओं में लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पारदर्शिता और तकनीक के बेहतर उपयोग से सहकारी समितियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही युवाओं को सहकारिता क्षेत्र से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने विभिन्न राज्यों में संचालित सफल सहकारिता मॉडलों के अनुभव साझा किए। कृषि, डेयरी, वन उत्पाद, महिला स्व-सहायता समूह और ग्रामीण उद्योगों से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि सहकारिता के जरिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता आधारित मॉडल को प्रभावी बताया गया। कई सफल सहकारी संस्थाओं और हितग्राहियों को सम्मानित भी किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सहकारी संस्थाओं को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

नवा रायपुर में आयोजित यह क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला राज्यों के बीच समन्वय, अनुभवों के आदान-प्रदान और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। कार्यक्रम से यह संदेश गया कि सहकारिता के माध्यम से समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का निर्माण संभव है।