प्रगति पत्रिका

joharcg.com स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रकाशित होने वाली प्रगति पत्रिका विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैचारिक क्षमता और शिक्षकों के मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। यह बात प्रदेश के मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने एक शैक्षणिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ साहित्यिक और रचनात्मक गतिविधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रगति पत्रिका केवल उपलब्धियों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सोच, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का दर्पण है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक अपने अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं, तब शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय प्रतिस्पर्धा का है, इसलिए केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। प्रगति पत्रिका जैसे मंच विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।

मंत्री श्री वर्मा ने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के शिल्पकार होते हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही छात्र अपनी क्षमताओं को पहचान पाते हैं और जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण तैयार करना समय की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थियों में नवाचार और सृजनात्मक सोच को बढ़ावा मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई प्रगति पत्रिका का विमोचन भी किया गया। पत्रिका में विद्यार्थियों की कविताएं, लेख, चित्रकला, विज्ञान परियोजनाएं तथा सामाजिक विषयों पर विचार प्रकाशित किए गए हैं। मंत्री श्री वर्मा ने पत्रिका की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल से विद्यार्थियों की प्रतिभा को नई पहचान मिलती है और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरणा प्राप्त होती है।

उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखें, बल्कि उनकी रचनात्मक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना है।