joharcg.com कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती निगार ने किसानों से अपील की है कि वे जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग को बढ़ावा दें, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता न केवल मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि किसानों की लागत भी बढ़ा रही है। ऐसे में जैविक विकल्प अपनाना समय की मांग है।
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि जैव उर्वरक मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सूक्ष्मजीवों के माध्यम से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है। वहीं नील-हरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) धान जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है, क्योंकि यह वातावरण से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती है।
श्रीमती निगार ने कहा कि जैव उर्वरकों के उपयोग से भूमि की संरचना में सुधार होता है और दीर्घकालिक उत्पादकता बनी रहती है। इससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पर विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने भी किसानों को जैव उर्वरकों के सही उपयोग और उनके लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैविक खेती अपनाने से उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को इन तकनीकों के बारे में जागरूक करें और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने बैठक में पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन की प्रगति की जानकारी ली और इसे तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए। खेती को बढ़ावा देने हेतु हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग को बढ़ाने किसानों को प्रोत्साहित करें।

