joharcg.com रायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा है कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ कौशल विकास भी युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाती है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार शिक्षा और कौशल विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री साव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बदलती वैश्विक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान तथा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करना समय की मांग है। जब युवा अपने ज्ञान को व्यवहारिक कौशल से जोड़ते हैं, तब उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास का विकास होता है और वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक सक्षम बनते हैं।

उन्होंने कहा कि कौशल विकास केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करता है। तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता, संचार कौशल, उद्यमिता और व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्र युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ रहे हैं। इससे वे बदलते रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकते हैं।
श्री साव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीकों और नवीन अवसरों से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। कौशल विकास केंद्रों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास का समन्वय समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक शिक्षित और कुशल युवा न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाता है, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसलिए युवाओं को सीखने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखते हुए नए कौशल अर्जित करने चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और युवाओं को संबोधित करते हुए श्री साव ने कहा कि आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। जब व्यक्ति किसी कार्य को करने की क्षमता और कौशल प्राप्त कर लेता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास स्वतः विकसित हो जाता है। यही आत्मविश्वास उसे जीवन में आगे बढ़ने और चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।

उन्होंने शिक्षकों और प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि वे युवाओं को ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में कौशल आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में श्री अरुण साव ने युवाओं से निरंतर सीखने, अपने कौशल को विकसित करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा और कौशल विकास के समन्वय से युवा नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

