joharcg.com मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण का ‘कर्म ही सच्ची पूजा है’ का संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि जब हम निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा और अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो वही ईश्वर की सबसे बड़ी भक्ति कहलाती है।
क्यों महत्वपूर्ण है (लोकल इम्पैक्ट): मुख्यमंत्री का यह आध्यात्मिक संदेश राज्य में सामाजिक समरसता और कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने वाला है। शासन के मुखिया द्वारा नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा पर जोर देने से सरकारी कामकाज और जन-सेवा के प्रति प्रशासनिक अधिकारियों व आम नागरिकों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अध्यात्म से सुधरेगा समाज का भविष्य

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक महान मार्गदर्शिका है। उन्होंने जशपुर और रायपुर के विभिन्न कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि सात्विक विचार ही एक विकसित छत्तीसगढ़ की नींव रखेंगे। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि प्रदेश की खुशहाली के लिए हर नागरिक को अपने-अपने क्षेत्र में पूरी ईमानदारी से ‘कर्म-योग’ करना चाहिए।
उन्होंने कथा आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और मूल्यों की जानकारी मिलती है। राज्य सरकार भी प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि छत्तीसगढ़ की पहचान एक आध्यात्मिक और प्रगतिशील राज्य के रूप में बनी रहे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान श्री हिमांशु कृष्ण भारद्वाज जी द्वारा कही जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रीमद्भागवत का मूल संदेश यही है कि कर्म ही सच्ची पूजा है। उन्होंने कहा कि हमें सच्चाई और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहकर मानव जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीराम मंदिर में भगवान के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाललीला के अंतर्गत माखनचोरी के प्रसंग का भक्तिभाव के साथ श्रवण किया। उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्री राम मंदिर परिसर में 6 अप्रैल से 12 अप्रैल तक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कथा के समापन अवसर पर भगवान बांके बिहारीलाल की आरती-पूजन में भी शामिल हुए।
मानव जीवन दुर्लभ, सेवा से ही सार्थकता : मुख्यमंत्री

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों के लिए जीते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्री राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। उन्होंने कहा कि लगभग पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ का जंगल ही दंडकारण्य क्षेत्र है और शिवरीनारायण माता शबरी की पावन भूमि है। गुरु घासीदास जैसे महान संतों की जन्मभूमि होने के कारण छत्तीसगढ़ एक धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध प्रदेश है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ईश्वर के आशीर्वाद से आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हो रहा है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

