joharcg.com छत्तीसगढ़ राज्य को खनिज संसाधनों के मामले में एक अपार संभावनाओं वाला राज्य माना जा रहा है, और इस पर विशेष टिप्पणी दी है पी. दयानंद, जो एक प्रमुख खनिज विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों की क्षमता को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने राज्य की खनिज संपदाओं के विशाल भंडार का उल्लेख किया।
पी. दयानंद के अनुसार, छत्तीसगढ़ का खनिज क्षेत्र भारत के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक है, और यहां विभिन्न प्रकार के खनिजों की प्रचुरता है, जिनमें कोयला, लौह अयस्क, बक्साइट, और अन्य महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इन खनिज संसाधनों के सही तरीके से दोहन और प्रबंधन से राज्य की आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है और यह न केवल राज्य के विकास बल्कि पूरे देश के विकास में सहायक साबित हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के उत्खनन से रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, राज्य में खनिज संसाधनों का उचित इस्तेमाल स्थानीय उद्योगों के लिए भी फायदेमंद होगा। दयानंद ने बताया कि राज्य सरकार को इन संसाधनों का इस्तेमाल सतत विकास के मॉडल के तहत करना चाहिए, ताकि पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े और खनिजों के दोहन से आर्थिक लाभ मिले।
इसके अलावा, पी. दयानंद ने राज्य में खनिज संसाधनों की तलाश और शोध के लिए अधिक निवेश करने का सुझाव दिया, ताकि अधिक खनिज भंडारों का पता चल सके और उनके दोहन के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सके। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में सही कदम उठाए जाते हैं तो छत्तीसगढ़ भविष्य में खनिज आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।
यह बयान छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं को लेकर नई दिशा और संभावनाएं पेश करता है, जो राज्य के विकास की गति को और तेज कर सकता है।
रायपुर 14 फरवरी 2025/ संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा बस्तर के बैलाडीला क्षेत्र के लौह अयस्क ब्लॉकों की नीलामी को लेकर आज नवा रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में ‘प्री-बिड कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया गया। इस बैठक में देशभर से आए खनन निवेशकों और बोलीदाताओं ने भाग लिया, जहां नीलामी प्रक्रिया, निवेश अवसरों, और खनिज संसाधनों पर विस्तृत चर्चा हुई।
अवसर पर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित तीन विश्व स्तरीय लौह अयस्क ब्लॉक एवं उत्तर बस्तर कांकेर के एक ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया पर चर्चा की गई। खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दिए और ई-नीलामी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों के मामले में अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जो उद्योग, व्यापार, और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक विकास का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ की भूमिका अहम होगी, क्योंकि यहां उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के विशाल भंडार उपलब्ध हैं।
उन्होंने बोलीदाताओं को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए आश्वस्त किया कि सरकार उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि बैलाडीला क्षेत्र भारत के इस्पात उद्योग की रीढ़ है और इस क्षेत्र के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में व्यापक वृद्धि होगी।
जीएसआई (GSI) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अमित धारवड़कर ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे समृद्ध खनिज संपन्न राज्य है। उन्होंने कहा कि बैलाडीला से दल्लीराजहरा तक फैला लौह अयस्क क्षेत्र विश्व के महत्वपूर्ण लौह अयस्क भंडारों में गिना जाता है, जो भारत के इस्पात उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म के संचालक सुनील कुमार जैन ने नीलामी प्रक्रिया और लौह अयस्क ब्लॉकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2030 तक देश में स्टील उत्पादन बढ़ाने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
संयुक्त संचालक एवं नोडल अधिकारी (ऑक्शन) अनुराग दीवान ने कहा कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश के लिए सबसे उपयुक्त राज्यों में से एक है और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
नीलामी प्रक्रिया के तहत 27 फरवरी 2025 तक दोपहर 3 बजे तक ऑनलाइन टेंडर डॉक्युमेंट खरीदे जा सकते हैं। 28 फरवरी 2025 तक दोपहर 3 बजे तक टेंडर सबमिट करने की अंतिम तिथि है। इच्छुक बोलीदाता नवा रायपुर स्थित संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, इंद्रावती भवन, ब्लॉक-4, द्वितीय तल पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में देशभर के खनन कंपनियों, औद्योगिक समूहों और निवेशकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
छत्तीसगढ़ के बैलाडीला क्षेत्र में स्थित लौह अयस्क भंडारों की उच्च गुणवत्ता और निवेश के अनुकूल वातावरण को देखते हुए नीलामी प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक रुझान देखने को मिला। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को खनन और इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।