छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवा सुधार

joharcg.com छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है (लोकल इम्पैक्ट): यह निर्णय छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों मरीजों के लिए सीधा राहत देने वाला है। अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित होने से गरीब परिवारों को महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर सख्त निर्देश

बैठक के दौरान राज्य के सभी जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMHO) को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्रों के अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि रायपुर, बिलासपुर, और बस्तर जैसे संभागों में रेफरल सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि मरीजों को बेवजह एक से दूसरे अस्पताल न भटकना पड़े।

अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक और डायलिसिस यूनिट के संचालन को लेकर विशेष हिदायत दी गई है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और आयुष्मान भारत योजना के तहत मिल रहे लाभों की भी गहन समीक्षा की है, ताकि योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियो की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक माननीय स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े।

बैठक का संचालन करते हुए सचिव श्री अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।