joharcg.com पंडवानी की अंतरराष्ट्रीय साधिका पद्मविभूषण डॉ. श्रीमती तीजन बाई को 8 जुलाई 2026 को रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर भव्य संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित राज्य के शीर्ष जनप्रतिनिधि और नामचीन कलाकार शामिल होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है (लोकल इम्पैक्ट): छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के स्वर्णिम अध्याय डॉ. तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ था, जिससे पूरे कला जगत में शोक है। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि सभा है बल्कि भावी पीढ़ी के लोक कलाकारों के लिए उनकी पांच दशक लंबी कला साधना और संघर्ष को सहेजने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।
मुक्ताकाशी मंच पर जुटेगा कला जगत

संस्कृति विभाग के अनुसार यह विशेष सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से शुरू होगा। इस महा-आयोजन में छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी और बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे। प्रदेश के प्रतिष्ठित लोक कलाकार गीत, संगीत, पंडवानी और लोकगायन की प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी को गांव के चौपाल से उठाकर वैश्विक मंचों तक पहुंचाया।
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी डॉ. तीजन बाई ने महज 13 वर्ष की उम्र में अपना पहला मंच प्रदर्शन किया था। उन्होंने पारंपरिक वेदमती शैली के विपरीत साहस दिखाते हुए कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी गाने की शुरुआत की थी। प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना, जिसके बाद उन्होंने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।

