वन मंत्री केदार कश्यप

joharcg.com रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई योजनाओं और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से हाथियों के संरक्षण को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि हाथी केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके संरक्षण से जैव विविधता का संतुलन बना रहता है और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी बल मिलता है। इसलिए हाथियों के सुरक्षित आवागमन, उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए विशेष रणनीति के साथ कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। विभिन्न वन क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है तथा स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। समय पर सूचना उपलब्ध कराने और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

श्री कश्यप ने कहा कि हाथियों के संरक्षण में स्थानीय ग्रामीणों और वनवासियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी, उनके व्यवहार और सुरक्षा उपायों की जानकारी देकर मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा हाथियों के लिए अनुकूल आवास विकसित करने, वन क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण और वन संपदा के संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे हाथियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होंगे और आबादी वाले क्षेत्रों में उनके प्रवेश की संभावना कम होगी।

वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आजीविका का भी ध्यान रखा जा रहा है। संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के संरक्षण के लिए सामुदायिक सहभागिता, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है, जिनके सकारात्मक परिणाम भविष्य में देखने को मिलेंगे।

श्री केदार कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, वन विभाग, स्थानीय समुदायों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों के संयुक्त प्रयासों से हाथियों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। इससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।