joharcg.com रमेन डेका ने जल संरक्षण को लेकर लोगों से व्यापक जनभागीदारी की अपील करते हुए कहा कि “जल संरक्षण जन आंदोलन बने, तभी भूजल स्तर में वृद्धि संभव है।” उन्होंने कहा कि जल संकट आज केवल किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जल बचाने की दिशा में जिम्मेदारी निभानी होगी।
राज्यपाल ने कहा कि तेजी से घटता भूजल स्तर चिंता का विषय है। यदि समय रहते जल संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। गांवों और शहरों में तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि जल का अत्यधिक दोहन और अनियोजित उपयोग पर्यावरण संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करें और अनावश्यक बर्बादी रोकें। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि नई पीढ़ी में जल बचाने की आदत विकसित हो सके।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को भी जल संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि पेड़-पौधे भूजल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिक से अधिक वृक्षारोपण से वर्षा चक्र बेहतर होता है और मिट्टी में जल संरक्षण की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, लेकिन इन योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग इसमें सहयोग करे। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आगे आने और जल बचाने के लिए जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि जल ही जीवन का आधार है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि आज हम जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य दिया जा सकेगा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने का संकल्प भी लिया।

