भोरमदेव मंदिर

joharcg.com उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सोमवार को प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर राज्य में शांति, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मंदिर पहुंचने पर पुजारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधानों के बीच विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। उप मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं से मुलाकात कर उनका अभिवादन भी स्वीकार किया।

इस दौरान श्री शर्मा ने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी प्राचीन स्थापत्य कला और सांस्कृतिक महत्व देशभर के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।

उप मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भी भाग लिया और क्षेत्रवासियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सरकार आमजन की भावनाओं और आस्थाओं का सम्मान करते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भोरमदेव मंदिर को ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है। अपनी अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

उप मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।

स्थानीय लोगों ने उप मुख्यमंत्री के मंदिर आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।