दूढ़ा नदी (Dudha River)
Dudha River District Kanker दूध नदी छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवाहित होने वाली नदी है। इसका उद्गम कांकेर से लगभग 15 कि.मी. की दूरी पर स्थित मलाजकुण्डम पहाड़ी से हुआ है, जो पूर्व की ओर बहते हुए महानदी में मिल जाती है।
- यह नदी महानदी की सहायक नदियों में से एक है।
- दूध नदी के तट पर पीचिंग निर्माण का कार्य नहीं होने के कारण नदी की तेज धार से भूमि का कटाव तेजी से हो रहा है।
- इस नदी में अक्सर पानी कम रहता है, लेकिन वर्षा के दौरान इसमें बाढ़ आ जाती है। नदी का प्रवाह भी काफ़ी तेज हो जाता है, जिससे नदी किनारे जमीनों का तेजी से कटाव होता है।
मलाजकुंडम दूध नदी का जलप्रपात है। इस जलप्रपात का दृश्य नीचे से मनोहारी लगता है। पूरी जलराशि अलग-अलग चरणो में नीचे तक आती है। चारों ओर हरियाली इसके सौंदर्य को और निखारती है। बडी जलराशि की धार जब नीचे आती है तो सैकडों फुहारें अपने साथ लाती है। जलराशि कहां से आ रही है यह जानने की उत्कंठा चट्टानो पर उपर चढने को मजबुर कर देती है। उपर चढने पर नीचे छोटी सी घाटी का अलग रूप देखने को मिलता है। उपर जाने पर दूध नदी का उद्गम स्थल मिलता है। यही से धारा निकलती है और पहाडी से नीचे आकर नदी का रूप धारण करती है। जलप्रपात नीचे आकर एक स्थान पर इकट्ठा होकर कुंड का रूप बनाता है। इसीलिये इसका नाम मलाजकुंडम पडा।
दूढ़ा नदी, कांकेर जिला
दूढ़ा नदी कांकेर जिले में बहती है, जो छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला है। यह नदी कांकेर जिले के उत्तरी भाग से होकर बहती है और अंततः महानदी नदी में मिलती है।[1]
दूढ़ा नदी का उद्गम कांकेर जिले के पहाड़ी इलाकों से होता है। यह नदी कांकेर जिले के विभिन्न गांवों और शहरों से होकर बहती है, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण हैं – बनाई, चिंचोली, कोटरी और बनौरा।[1]
दूढ़ा नदी का पानी कृषि और घरेलू उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। इसके किनारे स्थित गांवों के लोग इस नदी पर निर्भर हैं। यह नदी कांकेर जिले के पर्यावरण और जलवायु को भी प्रभावित करती है।[1]
कुल मिलाकर, दूढ़ा नदी कांकेर जिले का एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है जो स्थानीय लोगों और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।